कृषक भारती कोआपरेटिव लिमिटेड – विश्‍व की प्रमुख उर्वरक उत्‍पादक सहकारी संस्‍था


 



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प्रचालन उत्‍पादन हजीरा संयंत्र

हजीरा संयंत्र

मुद्रण पीडीएफ़

कृभको ने गुजरात में सूरत से 15 किमी. दूर ताप्ति नदी के किनारे सूरत हजीरा स्‍टेट हाईवे पर उर्वरक, अमोनिया तथा जैव उर्वरकों का उत्‍पादन करने के लिए हजीरा में एक उर्वरक संयंत्र स्‍थापित किया है।

भारत की भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्‍वर्गीय श्रीमती इं‍दिरा गांधी ने 5 फरवरी 1982 को इस संयंत्र की आधारशिला रखी थी।

हजीरा उर्वरक संयंत्र में अमोनिया की दो स्‍ट्रीम और यूरिया की चार स्‍ट्रीम हैं। यूरिया की पुनर्मूल्‍यांकिंत वार्षिक उत्‍पादन क्षमता 1.729 मिलियन मी.टन और अमोनिया की पुनर्मूल्‍यांकिंत वार्षिक उत्‍पादन क्षमता 1.003 मिलियन मी.टन है। इस परियोजना पर 957 करोड़ रू. की अनुमानित लागत की तुलना में 890 करोड़ रूपए की लागत आई थी और इस प्रकार परियोजना पूंजी लागत में 67 करोड़ रूपए (लगभग 7 प्रतिशत) की बचत हुई थी।

इस संयंत्र में नवम्‍बर 1985 में प्रायोगिक उत्‍पादन आरम्‍भ हुआ और तीन माह की अल्‍पावधि में ही 1 मार्च 1986 से वाणिज्यिक उत्‍पादन आरम्‍भ हुआ। तभी से यह संयंत्र अपने प्रचालन के सभी क्षेत्रों में उत्‍कृष्‍ट निष्‍पादन कर रहा है।

हजीरा संयंत्र में अगस्‍त 1995 में 100 मी.टन प्रतिवर्ष की क्षमता वाला जैव उर्वरक संयंत्र चालू किया गया। कृभको ने इस संयंत्र की 150 मी.टन अतिरिक्‍त क्षमता बढ़ाकर संयंत्र का विस्‍तार किया और इसमें दिसम्‍बर 1998 में उत्‍पादन आरम्‍भ हुआ।

हजीरा में उत्‍पादन

1. यूरिया
कृभको के पास 17.20 लाख मी.टन प्रतिवर्ष प्रील्‍ड यूरिया उत्‍पादन क्षमता है । यूरिया उत्‍पादन प्रक्रिया इटली की स्‍नेमप्रोगेति कम्‍पनी द्वारा सप्‍लाई की गई प्रौद्योगिकी पर आधारित है । मौजूदा सुविधा का रीवैम्पिंग कार्य किया जा रहा है और इस संयंत्र की रीवैम्पिंग के पश्‍चात 21.65 लाख मी.टन प्रतिवर्ष उत्‍पादन होने की संभावना है ।

2. अमोनिया
मुख्‍य फीड स्‍टाक के रूप में प्राकृतिक गैस का उपयोग करके अमोनिया का उपादन किया जाता है । इसके अन्‍य फीड स्‍टाक वाष्‍प और वायु हैं । अमोनिया का गैस रूप में उत्‍पादन करने से पहले इस फीड स्‍टाक को अमोनिया संयंत्र में कई प्रतिक्रियाओं से गुजरना पड़ता है । वाष्‍प रिफार्मिंग प्रोसेस का उपयोग करके अमोनिया का उत्‍पादन किया जाता है । यह प्रौद्योगिकी कैलोग, यूएसए द्वारा सप्‍लाई की गई है । अमोनिया संयंत्रों की संस्‍थापित क्षमता 10.02 लाख मी.टन प्रतिवर्ष है और रीवैम्‍प के पश्‍चात इसकी क्षमता बढ़कर 12.47 लाख मी.टन प्रतिवर्ष हो जाएगी । कार्बनडाइआक्‍साइड अमोनिया संयंत्र का उपोत्‍पाद है जिसका यूरिया संयंत्र में यूरिया उत्‍पादन के लिए उपयोग किया जाता है ।

3. तरल आर्गन गैस
कृभको ने अपने संयंत्र में तरल आर्गन गैस उत्‍पादन संयंत्र भी स्‍थापित किया है । इस संयंत्र का डिजाइन तरल आर्गन गैस का उत्‍पादन करने के लिए 7000एनएम3 प्रतिघंटा फीड गैस (जिसमें 12 से 14 प्रतिशत आर्गन गैस होती है) जिसकी शुद्धता न्‍यूनतम 99.9995 वाल्‍यूम प्रतिशत न्‍यूनतम (5पीपीएम अधिकतम शुद्धता ) है, की प्रोसेसिंग करता है और फीड स्‍टाक में मौजूद आर्गन की 94 प्रतिशत आर्गन गैस का उत्‍पादन करता है । यह संयंत्र क्रायोजनिक लिंडे प्रक्रिया पर आधारित है जिसमें कोल्‍ड बाक्‍स यूनिट, कम्‍प्रेशर, हीट एक्‍सचेंजर, आर्गन बायल आफ कंडेनसर, आर्गन रिकवरी कालम, आर्गन प्‍यूरीफिकेशन कालम, आर्गन एग्‍जारबर, एन2 रिफ्लक्‍स ड्रम आदि जैसे उपकरण और टेंकर लोडिंग सुविधा तथा सिलेंडर फिलिंग स्‍टेशन सहित 100एम3 क्षमता के दो आर्गन स्‍टोरेज टेंक शामिल हैं ।

4. जैव उर्वरक
कृभको ने अपने हजीरा संयंत्र में 1996 से जैव उर्वरकों का उत्‍पादन आरम्‍भ किया । इस संयंत्र की संस्‍थापित क्षमता 250 मी.टन प्रतिवर्ष है । बाद में दो और संयंत्र एक लांजा (महाराष्‍ट्र) और एक वारावसी (उत्‍तर प्रदेश) में लगाए गए जिनकी प्रत्‍येक की ऊपादन क्षमता 150 मी.टन प्रतिवर्ष है ।
कृभको द्वारा जैव उर्वरकों की सभी पांच प्रमुख स्‍ट्रेन राइजोबियम अर्थात राइजोबियम, एजोटोबैक्‍टर, पीएसएम, एसेटोबैक्‍टर तथा एजोसप्रिलियम का उत्‍पादन किया जाता है।